कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा – वसीम बरेलवी

वसीम बरेलवी जो कि उर्दू शायरी के ये एक बेहद प्रसिद्ध शायर हैं, उनकी ये खूबसूरत ग़ज़ल पढ़िए जिसका शीर्षक है – “कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा”.

वसीम बरेलवी Waseem Barelvi

कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा
मेरे जैसा यहाँ कोई न कोई रोज़ कम होगा

तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना रो चुका हूँ मैं
कि तू मिल भी अगर जाये तो अब मिलने का ग़म होगा

समन्दर की ग़लतफ़हमी से कोई पूछ तो लेता ,
ज़मीं का हौसला क्या ऐसे तूफ़ानों से कम होगा

मोहब्बत नापने का कोई पैमाना नहीं होता ,
कहीं तू बढ़ भी सकता है, कहीं तू मुझ से कम होगा

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