Tumhare Shehar Ka Mausam – Qaiser-Ul-Jafri

Tumhare Shehar Ka Mausam is a beautiful ghazal that is written by Qaiser-Ul-Jafri. Here the song has been sung by Ghazal singer Pitamber Pandey.

Tumhare Shehar Ka Mausam - Qaiser-Ul-Jafri

Song: Tumhare Shehar Ka Mausam
Album: Tumhare Shehar Ka Mausam
Singer: Pitamber Pandey
Music: Pitamber Pandey, Balkrishan Sharma
Lyrics: Qaiser-Ul-Jafri

Tumhare Shehar Ka Mausam Lyrics

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे

तुम्हारे बस में अगर हो तो भूल जाओ मुझे
तुम्हें भुलाने में शायद मुझे ज़माना लगे

जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो
कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे

वो फूल जो मिरे दामन से हो गए मंसूब
ख़ुदा करे उन्हें बाज़ार की हवा न लगे

न जाने क्या है किसी की उदास आँखों में
वो मुँह छुपा के भी जाए तो बेवफ़ा न लगे

तू इस तरह से मिरे साथ बेवफ़ाई कर
कि तेरे बा’द मुझे कोई बेवफ़ा न लगे

तुम आँख मूँद के पी जाओ ज़िंदगी ‘क़ैसर’
कि एक घूँट में मुमकिन है बद-मज़ा न लगे

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