Momin Khan Momin

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Momin Khan Momin

Momin Khan MominMomin Khan Momin (1800–14 May 1852) was a late Mughal era poet known for his Urdu ghazals. A lesser-known contemporary of Ghalib and Zauq, he used “Momin” as his nom de plume. His grave is located in the Mehdiyan cemetery in Maulana Azad Medical College, Delhi. Momin is known for his particular Persianized style and the beautiful use of his ‘takhallus’.

मोमिन ख़ाँ मोमिन एक मशहूर उर्दू कवि थे। ये हकीम, ज्योतिषी और शतरंज के खिलाड़ी भी थे। कहा जाता है मिर्ज़ा ग़ालिब ने इनके शेर ‘तुम मेरे पास होते हो गोया जब कोई दूसरा नही होता’ पर अपना पूरा दीवान देने की बात कही थी।

मोमिन ख़ाँ की ज़िंदगी और शायरी पर दो चीज़ों ने बहुत गहरा असर डाला। एक इनकी रंगीन मिज़ाजी और दूसरी इनकी धार्मिकता। लेकिन इनकी ज़िंदगी का सबसे दिलचस्प हिस्सा इनके प्रेम प्रसंगों से ही है। मुहब्बत ज़िंदगी का तक़ाज़ा बन कर बार-बार इनके दिलोदिमाग़ पर छाती रही। इनकी शायरी पढ़ कर महसूस होता है कि शायर किसी ख़्याली नहीं बल्कि एक जीती-जागती महबूबा के इश्क़ में गिरफ़्तार है।

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[Bio Credit – Wikipedia]