इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया – बेगम अख्तर

Ishq Mein Gairat-E-Jazbaat is a beautiful ghazal sung by Begum Akhtar. The music has been composed by Khaiyaam while Sudarshan Faakir has penned the ghazal.

Ishq Mein Gairat-E-Jazbaat Begam Akhtar Sudarshan Faakir

Song :- Ishq Mein Gairat-E-Jazbaat
Singer :- Begum Akhtar
Music Director :- Khaiyyaam
Lyricist :- Sudarshan Faakir

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया
वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया

आप कहते थे कि रोने से न बदलेंगे नसीब
उम्र भर आप की इस बात ने रोने न दिया

रोने वालों से कहो उन का भी रोना रो लें
जिन को मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया

तुझ से मिल कर हमें रोना था बहुत रोना था
तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया

एक दो रोज़ का सदमा हो तो रो लें ‘फ़ाकिर’
हम को हर रोज़ के सदमात ने रोने न दिया

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