दुनिया का सपना – त्रिलोचन

Trilochan was an eminent hindi poet who was widely popular. Read his hindi poem “Duniya Ka Sapna”. त्रिलोचन को हिन्दी साहित्य प्रगतिशील काव्यधारा का एक स्तम्भ माना जाता है. पढ़िए उनकी लिखी एक कविता “दुनिया का सपना”

Trilochan

तुम, जो मुझ से दूर, कहीं हो, सोच रहा हूँ,
और सोचना ही यह, जीवन है इस पल का,
अब जो कुछ है, वह कल के प्याले से छलका,
गतप्राय है। किसी लहर में मौन बहा हूँ,

अपना बस क्या। जीवन है दुनिया का सपना,
जब तक आँखों में है तब तक ज्योति बना है।
अलग हुआ तो आँसू है या तिमिर घना है।
बने ठीकरा तो भी मिट्टी को है तपना।

कल छू दी जो धूल आज वह फूल हो गई,
चमत्कार जिन हाथों में चुपचाप बसा है,
ऐसा हो ही जाता है। यह सत्य कसा है
सोना, जिस पर जमे मैल की पर्त खो गई।

पथ का वह रजकण हूँ जिस पर छाप पगों की
यहाँ वहाँ है; मूक कहानी सहज डगों की।

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