रात आधी खींच कर मेरी हथेली – हरिवंशराय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन की ये कविता “रात आधी खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था ‘प्यार’ तुमने”, बेहद खूबसूरत कविता है. प्यार से लिखी प्यार की ये कविता जितनी बार पढेंगे उतनी बार मन थोड़ा बेचैन होता है. यह प्रेम और वेदना कविता हिंदी साहित्य में लिखी गई सर्वश्रेष्ट प्रेम कविताओं में से एक मानी जाती है.

Raat Aadhi Kheench Kar Meri Hatheli (Roman) Very Beautiful poem in hindi written by Harivansh Rai Bachchan. 

रात आधी खींच कर मेरी हथेली

रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था ‘प्यार’ तुमने।

फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में
और चारों ओर दुनिया सो रही थी,
तारिकाएँ ही गगन की जानती हैं
जो दशा दिल की तुम्हारे हो रही थी,
मैं तुम्हारे पास होकर दूर तुमसे
अधजगा-सा और अधसोया हुआ सा,
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था ‘प्यार’ तुमने।

एक बिजली छू गई, सहसा जगा मैं,
कृष्णपक्षी चाँद निकला था गगन में,
इस तरह करवट पड़ी थी तुम कि आँसू
बह रहे थे इस नयन से उस नयन में,
मैं लगा दूँ आग इस संसार में है
प्यार जिसमें इस तरह असमर्थ कातर,
जानती हो, उस समय क्या कर गुज़रने
के लिए था कर दिया तैयार तुमने!
रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था ‘प्यार’ तुमने।

प्रात ही की ओर को है रात चलती
औ’ उजाले में अंधेरा डूब जाता,
मंच ही पूरा बदलता कौन ऐसी,
खूबियों के साथ परदे को उठाता,
एक चेहरा-सा लगा तुमने लिया था,
और मैंने था उतारा एक चेहरा,
वो निशा का स्वप्न मेरा था कि अपने पर
ग़ज़ब का था किया अधिकार तुमने।
रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था ‘प्यार’ तुमने।

और उतने फ़ासले पर आज तक सौ
यत्न करके भी न आये फिर कभी हम,
फिर न आया वक्त वैसा, फिर न मौका
उस तरह का, फिर न लौटा चाँद निर्मम,
और अपनी वेदना मैं क्या बताऊँ,
क्या नहीं ये पंक्तियाँ खुद बोलती हैं–
बुझ नहीं पाया अभी तक उस समय जो
रख दिया था हाथ पर अंगार तुमने।
रात आधी, खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था ‘प्यार’ तुमने।

Raat Aadhi Kheench Kar Meri Hatheli (Roman)

Very Beautiful poem in hindi written by Harivansh Rai Bachchan. 

Raat aadhii, khiinch kar merii hathelii
Ek ungalii se likhaa thaa ‘pyaar’ tumane.

Faasalaa thaa kuchh hamaare bistaron men
aur chaaron or duniyaa so rahii thii,
taarikaaen hii gagan kii jaanatii hain
jo dashaa dil kii tumhaare ho rahii thii

Main tumhaare paas hokar door tumase
adhajagaa-saa aur adhasoyaa huaa saa,
raat aadhii khiinch kar merii hathelii
raat aadhii, khiinch kar merii hathelii
ek ungalii se likhaa thaa ‘pyaar’ tumane.

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