कवि प्रदीप की ये तीन रचनाएँ मानव मन और सघर्ष की कवितायें हैं

कवि प्रदीप ने इन कविताओं में बड़ी सरलता से मानव मन के संघर्ष की बातें कही है. अपने आप में ये तीनों कवितायें खूबसूरत हैं.

alone sunset dream poem mahfil.in

अमृत और ज़हर दोनों हैं सागर में एक साथ – प्रदीप

अमृत और ज़हर दोनों हैं सागर में एक साथ
मंथन का अधिकार है सबको फल प्रभु तेरे हाथ
तेरे फूलों से भी प्यार
तेरे काँटों से भी प्यार
जो भी देना चाहे देदे करतार
दुनिया के तारनहार
तेरे फूलों से भी प्यार

चाहे सुख दे या दुःख, चाहे ख़ुशी दे या गम
मालिक जैसे भी रखेगा वैसे रह लेंगे हम
चाहे हंसी भरा संसार दे या आंसुओं की धार
दो भी देना चाहे देदे करतार
दुनिया के तारनहार

हमको दोनों हैं पसंद तेरी धूप और छाँव
दाता किसी भी दिशा में ले चल ज़िन्दगी की नाव
चाहे हमें लगा दे पार डूबा दे चाहे हमे मझधार
दो भी देना चाहे देदे करतार
दुनिया के तारनहार

हमने जग की अजब तस्वीर देखी – प्रदीप

हमने जग की अजब तस्वीर देखी
एक हँसता है दस रोते हैं
ये प्रभु की अद्भुत जागीर देखी
एक हँसता है दस रोते हैं

हमे हँसते मुखड़े चार मिले
दुखियारे चेहरे हज़ार मिले
यहाँ सुख से सौ गुनी पीड़ देखी
एक हँसता है दस रोते हैं
हमने जग की अजब तस्वीर देखी
एक हँसता है दस रोते हैं

दो एक सुखी यहाँ लाखों में
आंसू है करोड़ों आँखों में
हमने गिन गिन हर तकदीर देखी
एक हँसता है दस रोते हैं
हमने जग की अजब तस्वीर देखी
एक हँसता है दस रोते हैं

कुछ बोल प्रभु ये क्या माया
तेरा खेल समझ में ना आया
हमने देखे महल रे कुटीर देखी
एक हँसता है दस रोते हैं
हमने जग की अजब तस्वीर देखी
एक हँसता है दस रोते हैं

तुमको तो करोड़ो साल हुए – प्रदीप

तुमको तो करोड़ो साल हुए बतलाओ गगन गंभीर
इस प्यारी प्यारी दुनिया में क्यूँ अलग अलग तक़दीर

मिलते हैं किसी को बिन मांगे ही मोती
कोई मांगे लेकिन भीख नसीब ना होती
क्या सोच के है मालिक ने रची ये दो रंगी तस्वीर
इस प्यारी प्यारी दुनिया में क्यूँ अलग अलग तक़दीर

कुछ किस्मत वाले सुख से अमृत पीते
कुछ दिल पर रख कर पत्थर जीवन जीते
कहीं मन पंछी आकाश उड़े कहीं पाँव पड़ी ज़ंजीर
इस प्यारी प्यारी दुनिया में क्यूँ अलग अलग तक़दीर

Want More Like This?

Get Hindi and Punjabi Songs Lyrics, Poetry, Ghazals and Song Quotes directly in your MailBox

Poetry Latest!

Most Loved!

Latest Posts!