ईद के मौके पर नजीक अकबराबादी की नज्में – १

Eid Nazm Shayari

शाद था जब दिल वह था और ही ज़माना ईद का।
अब तो यक्सां है हमें आना न जाना ईद का॥
दिल का खू़न होता है जब आता है अपना हमको याद।
आधी-आधी रात तक मेंहदी लगाना ईद का।
आंसू आते हैं भरे जब ध्यान में गुज़रे है आह।
पिछले पहर से वह उठ-उठ कर नहाना ईद का।
इश्र तक जाती नहीं ख़ातिर से इस हसरत की बू।
इत्र बग़लों में वह भर-भर कर लगाना ईद का।
होंठ जब होते थे लाल, अब आंखें हो जाती हैं सुर्ख।
याद आता है जो हमको पान खाना ईद का।
दिल के हो जाते हैं टुकड़े जिस घड़ी आता है याद।
ईदगाह तक दिलबरों के साथ जाना ईद का।
गुलइज़ारों के मियां मिलने की ख़ातिर जब तो हम।
ठान रखते थे महीनों से बहाना ईद का।
अब तो यूं छुपते हैं जैसे तीर से भागे कोई।
तब बने फिरते ोि हम आप ही निशाना ईद का।
नींद आती थी न हरगिज, भूक लगती थी ज़रा।
यह खुशी होती थी जब होता था आना ईद का।

Eid Special Playlist by Mahfil : 

Want More Like This?

Get Hindi and Punjabi Songs Lyrics, Poetry, Ghazals and Song Quotes directly in your MailBox

Latest Lyrics

You would love this!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Get Songs Lyrics, Poetry, Ghazals and Song Quotes