सुराग – गुलाम अली

Presenting Ghulam Ali’s album surag Ghazal. All the ghazal music has been composed by Ghulam Ali himself.

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Teri Rang Niiyari Na Gayi – Hasrat Mohani 

ख़ूब-रूयों से यारियाँ न गईं
दिल की बे-इख़्तियारियाँ न गईं

अक्ल सब्र-आशना से कुछ न हुआ
शौक़ की बेकरारियाँ न गईं

दिन की सेहरा-नवर्दियाँ न छुटीं
शब की अख़्तर-शुमारियाँ न गईं

थे जो हमरंग-ए-नाज़ उनके सितम
जिनकी उम्मीदवरियाँ न गईं

तर्ज़-ए-मोमिन में मरहबा ‘हसरत’
तेरी रंगी-निगारियाँ न गईं

Teri Baatein Sunane Aaye – Ahmad Faraz

तेरी बातें ही सुनाने आये
दोस्त भी दिल ही दुखाने आये

फूल खिलते हैं तो हम सोचते हैं
तेरे आने के ज़माने आये

क्या कहीं फिर कोई बस्ती उजड़ी
लोग क्यूँ जश्न मनाने आये

सो रहो मौत के पहलू में ‘फ़राज़’
नींद किस वक़्त न जाने आये

Tamam Umr Tera Intzar Kiya – Hafeez Hosiyarpuri 

तमाम उम्र तेरा इंतज़ार हमने किया
इस इंतज़ार में किस किससे प्यार हमने किया

कोई मिलता है तो अब अपना पता पूछता हूँ
मैं तेरी खोज में तुझसे भी परे जा निकला

तोड़ कर देख लिया आईना-ए-दिल तूने
तेरी सूरत के सिवा और बता क्या निकला

तलाश-ए-दोस्त को इक उम्र चाहिये ऐ दोस्त
के एक उम्र तेरा इंतज़ार हमने किया

दबा के कब्र में सब चल दिये दुआ न सलाम
ज़रा सी देर में क्या हो गया ज़माने को

‘क़मर’ ज़रा भी नहीं तुझको ख़ौफ़-ए-रुस्वाई
के चाँदनी में चले हो उन्हें मनाने को

तेरे ख़याल में दिल शादमा रहा बरसों
तेरे हुज़ूर इसे सोगवार हमने किया

ये तिश्नगी है के उनसे क़रीब रह कर भी
‘हफ़ीज़’ याद उन्हें बार बार हमने किया

Ye Baatein Jhoothi Hain – Ibne Insha

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशा जी का नाम न लो, क्या इंशा जी सौदाई हैं?

हैं लाखों रोग ज़माने में, क्यों इश्क़ है रुसवा बेचारा
हैं और भी वजहें वहशत की, इन्सान को रखतीं दुखियारा

हाँ बेकल-बेकल रहता है, हो प्रीत में जिसने दिल हारा
पर शाम से लेके सुबह तलक, यूँ कौन फिरे है आवारा

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशा जी का नाम न लो, क्या इंशा जी सौदाई हैं?

गर इश्क़ किया है तब क्या है, क्यूँ शाद नहीं आबाद नहीं
जो जान लिये बिन टल ना सके, ये ऐसी भी उफ़ताद[3] नहीं

ये बात तो तुम भी मानोगे, वो क़ैस नहीं फ़रहाद नहीं
क्या हिज्र का दारू मुश्किल है, क्या वस्ल के नुस्ख़े याद नहीं

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशा जी का नाम न लो, क्या इंशा जी सौदाई हैं

जो हमसे कहो हम करते हैं, क्या इंशा को समझाना है
उस लड़की से भी कह लेंगे, गो अब कुछ और ज़माना है

या छोड़ें या तकमील करें, ये इश्क़ है या अफ़साना है
ये कैसा गोरख धंधा है, ये कैसा ताना बाना है

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम इंशा जी का नाम न लो, क्या इंशा जी सौदाई हैं

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