लायी हयात, आये, क़ज़ा ले चली, चले – जौक

Lai Hayat Aae Qaza (लायी हयात आये क़ज़ा ले चली चले) – मोहम्मद इब्राहीम जौक़ की ग़ज़ल सुनिए. इस बेहतरीन ग़ज़ल को यूँ तो बहुत गायकों ने गाया है. यहाँ सुनिए बेगम अख्तर की आवाज़ में ये ग़ज़ल. लिंक नीचे है –

लायी हयात आये, क़ज़ा ले चली, चले  Lai Hayat Aae Qaza  Zauq

लायी हयात, आये, क़ज़ा ले चली, चले
अपनी ख़ुशी न आये न अपनी ख़ुशी चले

बेहतर तो है यही कि न दुनिया से दिल लगे
पर क्या करें जो काम न बे-दिल्लगी चले

कम होंगे इस बिसात पे हम जैसे बद-क़िमार
जो चाल हम चले सो निहायत बुरी चले

हो उम्रे-ख़िज़्र भी तो भी कहेंगे ब-वक़्ते-मर्ग
हम क्या रहे यहाँ अभी आये अभी चले

दुनिया ने किसका राहे-फ़ना में दिया है साथ
तुम भी चले चलो युँ ही जब तक चली चले

नाज़ाँ न हो ख़िरद पे जो होना है वो ही हो
दानिश तेरी न कुछ मेरी दानिशवरी चले

जा कि हवा-ए-शौक़ में हैं इस चमन से ‘ज़ौक़’
अपनी बला से बादे-सबा अब कहीं चले

Lai Hayat Aae Qaza (English Font)

Lai Hayat Aae Qaza le chalii, chale
Apani khushii n aaye n apanii khushii chale

Behatar to hai yahii ki n duniyaa se dil lage
Par kyaa karen jo kaam n be-dillagii chale

Kam honge is bisaat pe ham jaise bad-kimaar
Jo chaal ham chale so nihaayat burii chale

Ho umre-khijr bhii to bhii kahenge b-vakte-marg
Ham kyaa rahe yahaan abhii aaye abhii chale

Duniyaa ne kisakaa raahe-fnaa men diyaa hai saath
Tum bhii chale chalo yun hii jab tak chalii chale

Naajaan n ho khirad pe jo honaa hai vo hii ho
Daanish terii n kuchh merii daanishavarii chale

Jaa ki havaa-e-shauk men hain is chaman se ‘zauq’
Apani balaa se baade-sabaa ab kahiin chale

इस ग़ज़ल को अब बेगम अख्तर की आवाज़ में यूट्यूब पर सुनिए – 

Song :- Lai Hayat Aae Qaza
Singer :- Begum Akhtar
Music Director :- Khaiyyaam
Lyricist :- Zauq

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