फिर वही शाम – तलत महमूद के तीन गाने

आज सुनिए तलत महमूद की आवाज़ में ये तीन खूबसूरत नगमें…

गाना : फिर वही शाम, वही गम
फिल्म : जहां आरा 
गीतकार : राजेन्द्र कृष्ण 
गायक : तलत मेहमूद 
संगीतकार : मदन मोहन 

फिर वोही शाम, वोही गम, वोही तनहाई है
दिल को समझाने तेरी याद चली आयी है

फिर तसव्वुर तेरे पहलू में बिठा जाएगा
फिर गया वक्त घड़ी भर को पलट आयेगा
दिल बहल जाएगा आखिर को तो सौदाई है

जाने अब तुझ से मुलाक़ात कभी हो के न हो
जो अधूरी रही वो बात कभी हो के न हो
मेरी मंज़िल तेरी मंज़िल से बिछड आयी है






गाना – शाम ए-गम की कसम 
फिल्म – फूटपाथ
गायक : तलत मेहमूद 
संगीतकार : खय्याम 

शाम-ए-गम की कसम, आज ग़मगीं है हम
आ भी जा, आ भी जा आज मेरे सनम
दिल परेशान है, रात वीरान है
देख जा किस तरह आज तनहा है हम

चैन कैसा जो पहलू में तू ही नहीं
मार डाले ना दर्द-ए-जुदाई कही
रुत हंसी है तो क्या, चांदनी है तो क्या
चांदनी जुल्म है, और जुदाई सितम

अब तो आजा के अब रात भी सो गयी
जिन्दगी ग़म के सेहराओ में खो गयी
ढूँढती है नजर, तू कहा है मगर
देखते देखते आया आँखों में ग़म



गाना – : ज़िन्दगी देनेवाले सुन 
फिल्म  – दिल ए नादान 
गीतकार : शकिल बदायुनी
गायक : तलत मेहमूद 

जिंदगी देनेवाले सुन
तेरी दुनियाँ से दिल भर गया
मैं यहाँ जीते जी मर गया

रात कटती नहीं, दिन गुजरता नहीं
जख्म ऐसा दिया है के भरता नहीं
आँख वीरान है, दिल परेशान है
गम का सामान है, जैसे जादू कोई कर गया

बे-ख़ता तूने मुझ से खुशी छीन ली
ज़िंदा रखा मगर जिंदगी छीन ली
कर दिया दिल का खून, चूप कहा तक रहूँ
साफ़ क्यों ना कहूँ, तू ख़ुशी से मेरी डर गया

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